ऐनी सेक्सटन । Anne Sexton

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The complete poems by Anne Sexton

My faith is a great weight hung on a small wire, as doth the spider hang her baby on a thin web, as doth the vine, twiggy and wooden,
hold up grapes like eyeballs,
as many angels dance on the head of a pin.
God does not need too much wire to keep
Him there, just a thin vein, with blood pushing back and forth in it, and some love.
As it has been said:
Love and a cough cannot be concealed.
Even a small cough.
Even a small love.
So if you have only a thin wire,
God does not mind.
He will enter your hands as easily
as ten cents used to bring forth a Coke.

इब्ने इंशा । Ibne Insha

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Ibne Insha

कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तेरा

हम भी वहीं मौजूद थे, हम से भी सब पूछा किए,
हम हँस दिए, हम चुप रहे, मंज़ूर था परदा तेरा

इस शहर में किस से मिलें हम से तो छूटी महिफ़लें,
हर शख़्स तेरा नाम ले, हर शख़्स दीवाना तेरा

कूचे को तेरे छोड़ कर जोगी ही बन जाएँ मगर,
जंगल तेरे, पर्वत तेरे, बस्ती तेरी, सहरा तेरा

तू बेवफ़ा तू मेहरबाँ हम और तुझ से बद-गुमाँ,
हम ने तो पूछा था ज़रा ये वक्त क्यूँ ठहरा तेरा

हम पर ये सख़्ती की नज़र हम हैं फ़क़ीर-ए-रहगुज़र,
रस्ता कभी रोका तेरा दामन कभी थामा तेरा

दो अश्क जाने किस लिए, पलकों पे आ कर टिक गए,
अल्ताफ़ की बारिश तेरी अक्राम का दरिया तेरा

हाँ हाँ, तेरी सूरत हँसी, लेकिन तू ऐसा भी नहीं,
इस शख़्स के अश‍आर से, शोहरा हुआ क्या-क्या तेरा

बेशक, उसी का दोष है, कहता नहीं ख़ामोश है,
तू आप कर ऐसी दवा बीमार हो अच्छा तेरा

बेदर्द, सुननी हो तो चल, कहता है क्या अच्छी ग़ज़ल,
आशिक़ तेरा, रुसवा तेरा, शायर तेरा, ‘इन्शा’ तेरा

जॉर्ज एलियट । George Eliot

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George Eliot

A poem by George Eliot

​If you sit down at set of sun
And count the acts that you have done,
And, counting, find
One self-denying deed, one word
That eased the heart of him who heard,
One glance most kind
That fell like sunshine where it went

Then you may count that day well spent.

But if, through all the livelong day,
You’ve cheered no heart, by yea or nay
If, through it all
You’ve nothing done that you can trace
That brought the sunshine to one face–
No act most small
That helped some soul and nothing cost

Then count that day as worse than lost

कार्ल सैंडबर्ग । Carl Sandburg

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Carl Sandburg

Carl Sandburg

दुष्यंत कुमार | Dushyant Kumar

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Dushyant Kumar

Dushyant Kumar

​नज़र-नवाज़ नज़ारा बदल न जाए कहीं
जरा-सी बात है मुँह से निकल न जाए कहीं

वो देखते है तो लगता है नींव हिलती है
मेरे बयान को बंदिश निगल न जाए कहीं

यों मुझको ख़ुद पे बहुत ऐतबार है लेकिन
ये बर्फ आंच के आगे पिघल न जाए कहीं

चले हवा तो किवाड़ों को बंद कर लेना
ये गरम राख़ शरारों में ढल न जाए कहीं

तमाम रात तेरे मैकदे में मय पी है
तमाम उम्र नशे में निकल न जाए कहीं

कभी मचान पे चढ़ने की आरज़ू उभरी
कभी ये डर कि ये सीढ़ी फिसल न जाए कहीं

ये लोग होमो-हवन में यकीन रखते है
चलो यहां से चलें, हाथ जल न जाए कहीं