ताबिश देहलवी | Tabish Dehalvi

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बेक़रारी सी बेक़रारी है
दिन भी भारी था रात भारी है

ज़िन्दगी की बिसात पर अक्सर
जीती बाज़ी भी हमने हारी है

तोड़ो दिल मेरा शौक़ से तोड़ो
चीज़ मेरी नहीं तुम्हारी है

बार ऐ हस्ती उठा सका न कोई
ये ग़म ऐ दिल जहाँ से भारी है

आँख से छुप के दिल में बैठे हो
हाय कैसी ये पर्दादारी है

Tabish Dehlavi

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