शहाब जाफ़री | Shahab Jaafrey

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घर जो लौटे भी सर ऐ शाम तो कुछ पास न था
दिन से परछाईं मिली थी सो कहीं छूट गई

बूद ओ बाश अपनी न पूछो की इसी शहर में हम
सादगी गाँव की लाये थे यहीं छूट गई

Shahab Jaffery

Shahab Jaffery

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