शाद अज़ीमाबादी | Shad Azeemabadi

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तमन्नाओं में उलझाया गया हूँ
खिलौने दे के बहलाया गया हूँ

हूँ इस कूचे में हर ज़र्रे से आगाह
इधर से मुद्दतों आया गया हूँ

दिल ऐ मुज़्तर से पूछ ऐ रौनक़ ऐ बज़्म
मैं खुद आया नहीं लाया गया हूँ

सवेरा है बहुत ऐ शोर ऐ महशर
अभी बेकार उठवाया गया हूँ

लहद में क्यूँ न जाऊँ मुँह छुपाये
भरी महफ़िल से उठवाया गया हूँ

कुजा मैं और कुजा ऐ ‘शाद’ दुनिया
कहाँ से किस जगह लाया गया हूँ

*कुजा – कहाँ

Shad Azeemabadi

Shad Azeemabadi

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