रज़ि तिर्मिज़ी | Razi Tirmirzi

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Razi Tirmirzi

Razi Tirmirzi

सो रहा था तो शोर बरपा था
उठ के देखा तो मैं अकेला था

ख़ाक पर मेरे ख़्वाब बिखेर थे
और मैं रेज़ा रेज़ा चुनता था

चार जानिब वजूद की दीवार
अपनी आवाज़ मैं ही सुनता था

उम्र भर बूँद बूँद को तरसे
सामने घर के एक दरिया था

लब-ए-दरिया खड़े रहे दोनो
वो भी प्यासा था मैं भी प्यासा था

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