क़तील शिफ़ाई | Qateel Shifai

Image

एक एक पत्थर जोड़ के मैंने जो दीवार बनाई है
झाँकू उसके पीछे तो रुसवाई ही रुसवाई है

यूँ लगता है सोते जागते औरों का मोहताज हूँ मैं
आँखें मेरी अपनी हैं पर उनमे नींद पराई है

देख रहे हैं सब हैरत से नीले नीले पानी को
पूछे कौन समंदर से तुझमें कितनी गहराई है

सब कहते हैं एक जन्नत उतरी है मेरी धरती पर
मैं दिल में सोचूं शायद कमज़ोर मेरी बीनाई है

बाहर सहन में पेड़ों पर कुछ जलते बुझते जुगनू थे
हैरत है फिर घर के अंदर किसने आग लगाई है

Qateel Shifai

Qateel Shifai