मंसूर उस्मानी | Mansoor Usmani

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हमारे जैसी किसी की उड़ान थोड़ी है
जहाँ हम हैं वहां आसमान थोड़ी है 

ग़ज़ल के शहर मे शायर हज़ार हैं लेकिन 
किसी का मीर से ऊँचा मकान थोड़ी है 

बिछड़ के तुझसे मेरी ज़िन्दगी है बेमकसद 
ये तेरा कौल था मेरा बयान थोड़ी है  Continue reading

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