गोरख पांडेय | Gorakh Pandey

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Gorakh Pandey

Gorakh Pandey

महज़ ढाँचा नहीं है
लोहे या काठ का
‘कद’ है कुर्सी
कुर्सी के मुताबिक वो
बड़ा है छोटा है
स्वाधीन है या अधीन है
ख़ुश है या ग़मगीन है
कुर्सी में जज़्ब हो जाता है
एक अदद आदमी

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