बाल स्वरुप राही | Bal Swarup Rahi

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खेतों का हरापन मैं कहाँ देख रहा हूँ
मैं रेल के इंजिन का धुंआ देख रहा हूँ

सब आपकी आँखों से जहां देख रहे हैं
मैं आपकी आँखों में जहां देख रहा हूँ

जो मैंने ख़रीदा था कभी बेच के खुद को
नीलाम में बिकता वो मकाँ देख रहा हूँ

Bal Swarup Rahi

Bal Swarup Rahi

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