आशुफ़्ता चंगेज़ी | Ashufta Changezi

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किसकी तलाश है हमें किसके असर में हैं
घर से चले हैं जब से मुसलसल सफ़र में हैं

सरे तमाशे ख़त्म हुए लोग जा चुके
इक हम ही रह गए जो फरेब ऐ सहर में हैं

अब के बहार देखिये क्या नक़्श छोड़ जाये
आसार बादलों के न पत्ते शजर में हैं

तुझसे बिछड़ना कोई नया हादसा नहीं
ऐसे हज़ार क़िस्से हमारी ख़बर में हैं

‘आशुफ़्ता’ सब गुमान धरा रह गया यहां
कहते न थे की ख़ामियाँ तेरे हुनर में हैं

Ashufta Changezi

Ashufta Changezi

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