अफ़्सर अमरोहवी | Afsar Amrohvi

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यूँ ग़म छुपा के हँसता हूँ जैसे नया रईस
अहबाब को भी अपना पुराना पता न दे

जो सर उठा के चलने की तरग़ीब दे मुझे
ऐसा उरूज मेरी ग़ज़ल को खुदा न दे

#asfaramrohvi #mukarrar

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