100th Post | 100 कवि

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Mukarrar's 100th Post

Mukarrar’s 100th Post

Extending a big thank you to all of you who have been a part of this wonderful journey. This is just the beginning and we will work to feature more and more gems from world poetry on this platform. Gratitude for being a part of this, you make it worthwhile. Keep reading, keep writing. 

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JAUN ELIYA

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Jaun Eliya_Post_1

बात ही कब किसी की मानी है
अपनी हठ पूरी करके छोड़ोगी
ये कलाई, ये जिस्म और ये कमर
तुम सुराही ज़रूर तोड़ेगी

तिलोक चंद महरूम | Tilok Chand Mehroom

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इंकार ऐ गुनाह भी किये जाता हूँ
तकरार ऐ गुनाह भी किये जाता हूँ
हासिल हो सवाब मुफ़्त इस लालच में
इकरार ऐ गुनाह भी किये जाता हूँ

Tilok Chand Mehroom

Tilok Chand Mehroom

राजेंद्र नाथ रहबर | Rajendra Nath Rahbar

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पत्ती पत्ती ने एहतराम किया
झुक के हर शाख ने सलाम किया
बढ़ के फूलों ने पाँव चूम लिए
तुमने जब बाग़ में खिराम किया

Rajendra Nath Rahbar

Rajendra Nath Rahbar

मेराज़ फ़ैज़ाबादी | Meraz Faizabadi

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आँख और ख़्वाब में एक रात की दूरी रखना
ऐ मुस्सव्विर मेरी तस्वीर अधूरी रखना
अब के तकमील जो करना कोई रिश्तों का निज़ाम
दुश्मनी के भी कुछ आदाब ज़रूरी रखना

Meraz Faizabadi

Meraz Faizabadi