JAUN ELIYA

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Jaun Eliya_Post_1

बात ही कब किसी की मानी है
अपनी हठ पूरी करके छोड़ोगी
ये कलाई, ये जिस्म और ये कमर
तुम सुराही ज़रूर तोड़ेगी

तिलोक चंद महरूम | Tilok Chand Mehroom

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इंकार ऐ गुनाह भी किये जाता हूँ
तकरार ऐ गुनाह भी किये जाता हूँ
हासिल हो सवाब मुफ़्त इस लालच में
इकरार ऐ गुनाह भी किये जाता हूँ

Tilok Chand Mehroom

Tilok Chand Mehroom

राजेंद्र नाथ रहबर | Rajendra Nath Rahbar

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पत्ती पत्ती ने एहतराम किया
झुक के हर शाख ने सलाम किया
बढ़ के फूलों ने पाँव चूम लिए
तुमने जब बाग़ में खिराम किया

Rajendra Nath Rahbar

Rajendra Nath Rahbar

मेराज़ फ़ैज़ाबादी | Meraz Faizabadi

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आँख और ख़्वाब में एक रात की दूरी रखना
ऐ मुस्सव्विर मेरी तस्वीर अधूरी रखना
अब के तकमील जो करना कोई रिश्तों का निज़ाम
दुश्मनी के भी कुछ आदाब ज़रूरी रखना

Meraz Faizabadi

Meraz Faizabadi