सुब्हान असद | Subhan Asad

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Subhan Asad’s Poetry

हसरत मोहानी । Hasrat Mohani

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Ghazal by Hasrat Mohani

Hasrat Mohani

भुलाता लाख हुँ लेकिन बराबर याद आते हैं
इलाही, तर्के-उल्फ़त पर वो क्यों कर याद आते हैं

न छेड़ ऐ हमनशीं कैफ़ियते-सहबा के अफ़साने
शराब-ऐ-बेखुदी के मुझको सागर याद आते हैं

रहा करते हैं क़ैद-ऐ-होश में ऐ वाए-नाकामी
वो दश्त-ऐ-ख़ुद-फ़रामोशी के चक्कर याद आते हैं

नहीं आती तो याद उनकी महीनों तक नहीं आती
मगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं

हक़ीक़त खुल गई हसरत तिरे तर्के-मोहब्बत की
तुझे तो अब वो पहले से भी बढ़कर याद आते हैं

क़मर बदायुनी । Qamar Badayuni

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Naamabar tu hi bata by Qamar Badayuni

मोमिन खाँ मोमिन । Momin Khan Momin

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Momin Khan Momin

असर उसको ज़रा नहीं होता
रंज राहत-फिज़ा नहीं होता

बेवफा कहने की शिकायत है,
तो भी वादा वफा नहीं होता

जिक़्रे-अग़ियार से हुआ मालूम,
हर्फ़े-नासेह बुरा नहीं होता

तुम हमारे किसी तरह न हुए,
वर्ना दुनिया में क्या नहीं होता

उसने क्या जाने क्या किया लेकर,
दिल किसी काम का नहीं होता

नारसाई से दम रुके तो रुके,
मैं किसी से खफ़ा नहीं होता

तुम मेरे पास होते हो गोया,
जब कोई दूसरा नहीं होता

हाले-दिल यार को लिखूँ क्यूँकर,
हाथ दिल से जुदा नहीं होता

क्यूं सुने अर्ज़े-मुज़तर ऐ ‘मोमिन’
सनम आख़िर ख़ुदा नहीं होता

निदा फ़ाज़ली । Nida Fazli

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Nida Fazli

Nida Fazli

ज़फ़र गोरखपुरी । Zafar Gorakhpuri

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Zafar Gorakhpuri

Zafar Gorakhpuri

मेरे बाद किधर जाएगी तन्हाई
मैं जो मरा तो मर जाएगी तन्हाई

मैं जब रो रो के दरिया बन जाऊँगा
उस दिन पार उतर जाएगी तन्हाई

तन्हाई को घर से रुख़्सत कर तो दो
सोचो किसके घर जाएगी तन्हाई

वीराना हूँ आबादी से आया हूँ
देखेगी तो डर जाएगी तन्हाई

यूँ आओ की पाँव की भी आवाज़ ना हो
शोर हुआ तो मर जाएगी तन्हाई

रईस अख़्तर । Rais Akhtar

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Rais Akhtar

Rais Akhtar