राम धारी सिंह दिनकर । Ram Dhari Singh Dinkar

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Ram Dhari Singh Dinkar

Chand ka kurta by Dinkar


एक बार की बात, चंद्रमा बोला अपनी माँ से
“कुर्ता एक नाप का मेरी, माँ मुझको सिलवा दे
नंगे तन बारहों मास मैं यूँ ही घूमा करता
गर्मी, वर्षा, जाड़ा हरदम बड़े कष्ट से सहता.”

माँ हँसकर बोली, सिर पर रख हाथ,
चूमकर मुखड़ा

“बेटा खूब समझती हूँ मैं तेरा सारा दुखड़ा
लेकिन तू तो एक नाप में कभी नहीं रहता है
पूरा कभी, कभी आधा, बिलकुल न कभी दिखता है”
“आहा माँ! फिर तो हर दिन की मेरी नाप लिवा दे 
एक नहीं पूरे पंद्रह तू कुर्ते मुझे सिला दे.”

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One thought on “राम धारी सिंह दिनकर । Ram Dhari Singh Dinkar

  1. आप इन महान हस्तियों की अमर कृतियों को सहेजने का बेहतरीन प्रयास कर रहे हैं
    शुभकामनाएँ 😊

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