अल्लामा इक़बाल । Allama Iqbal

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Allama Iqbal

Allama Iqbal


आता है याद मुझको गुज़रा हुआ ज़माना
वो बाग़ की बहारें, वो सब का चह-चहाना

आज़ादियाँ कहाँ वो, अब अपने घोसले की
अपनी ख़ुशी से आना अपनी ख़ुशी से जाना

लगती हो चोट दिल पर, आता है याद जिस दम
शबनम के आँसुओं पर कलियों का मुस्कुराना

वो प्यारी-प्यारी सूरत, वो कामिनी-सी मूरत
आबाद जिस के दम से था मेरा आशियाना

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शॉर्लेट ब्रोंटे । Charlotte Bronte

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Charlotte Bronte

Charlotte Bronte

​LIFE, believe, is not a dream
So dark as sages say;
Oft a little morning rain
Foretells a pleasant day.
Sometimes there are clouds of gloom,
But these are transient all;

If the shower will make the roses bloom,
O why lament its fall ?
Rapidly, merrily,
Life’s sunny hours flit by,
Gratefully, cheerily,
Enjoy them as they fly !

What though Death at times steps in
And calls our Best away ?
What though sorrow seems to win,
O’er hope, a heavy sway ?
Yet hope again elastic springs,

Unconquered, though she fell;
Still buoyant are her golden wings,
Still strong to bear us well.
Manfully, fearlessly,
The day of trial bear,
For gloriously, victoriously,
Can courage quell despair !

कबीर । KABIR

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Kabir

Kabir

​यह संसार कागद की पुडिया, बूँद पडे गलि जाना है।
यह संसार काँटे की बाडी, उलझ पुलझ मरि जाना है॥
यह संसार झाड और झाँखर आग लगे बरि जाना है।
कहत ‘कबीर सुनो भाई साधो, सतुगरु नाम ठिकाना है

दुष्यंत कुमार । Dushyant Kumar

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Dushyant Kumar

Dushyant Kumar

​घंटियों की आवाज़ कानों तक पहुँचती है
एक नदी जैसे दहानों तक पहुँचती है

अब इसे क्या नाम दें, ये बेल देखो तो
कल उगी थी आज शानों तक पहुँचती है

खिड़कियां, नाचीज़ गलियों से मुख़ातिब है
अब लपट शायद मकानों तक पहुँचती है

आशियाने को सजाओ तो समझ लेना,
बरक कैसे आशियानों तक पहुँचती है

तुम हमेशा बदहवासी में गुज़रते हो,
बात अपनों से बिगानों तक पहुँचती है

सिर्फ़ आंखें ही बची हैं चँद चेहरों में
बेज़ुबां सूरत, जुबानों तक पहुँचती है

अब मुअज़न की सदाएं कौन सुनता है
चीख़-चिल्लाहट अज़ानों तक पहुँचती है

मैरी एलिज़ाबेथ फ्राई । Mary Elizabeth Frye

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Mary Elizabeth Frye

Mary Elizabeth Frye

Do not stand at my grave and weep
I am not there. I do not sleep.

I am a thousand winds that blow.
I am the diamond glints on snow.
I am the sunlight on ripened grain.
I am the gentle autumn rain.

When you awaken in the morning’s hush
I am the swift uplifting rush
Of quiet birds in circled flight.
I am the soft stars that shine at night

Do not stand at my grave and cry;
I am not there. I did not die.